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Wednesday, January 9, 2019

सोना खरीदने के लिए मिलेगा लोन, बचत खाते जैसे होंगे गोल्ड अकाउंट; जल्द लागू हो सकती है पॉलिसी

सोना खरीदने के लिए मिलेगा लोन, बचत खाते जैसे होंगे गोल्ड अकाउंट; जल्द लागू हो सकती है पॉलिसी
बजट में की गई थी गोल्ड पॉलिसी लागू करने की घोषणा

इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजे) के सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, सोना संपत्ति बन जाएगा तो इसे खरीदने के लिए बैंक से लोन भी मिल सकता है। अभी किसी परिवार (पति, पत्नी और अविवाहित लड़की) के पास 850 ग्राम से ज्यादा सोना होने की स्थिति में ही उसे इसे अपनी आय में बताना जरूरी होता है, यह संपत्ति की श्रेणी में नहीं आता है।

सुरेंद्र मेहता कहते हैं, 'गोल्ड को असेट क्लास का दर्जा देने से गोल्ड में प्योरिटी आस्पेक्ट बढ़ेगा। हॉलमार्क जरूरी होगा। इसके अलावा असेट क्लास की चीजों को खरीदने के लिए सरकार लोन देती है। यानी गोल्ड को असेट क्लास में लाने से सोना खरीदने के लिए बैंकों से लोन मिलने का रास्ता खुल सकता है'।

वे कहते हैं कि गोल्ड को अब असेट क्लास में लाए जाने से इंश्योरेंस, प्रोविडेंट फंड का पैसा, एलआईसी वाले भी गोल्ड हैज करके रखेंगे। इस तरह हर चीज को गोल्ड से लिंक करने का रास्ता खुलेगा। ईटीएफ अकाउंट होल्डर जब आज पैसा देता है तो संबंधित कंपनी गोल्ड खरीदकर रिजर्व रखते हैं, गोल्ड सेविंग अकाउंट बैंक अकाउंट की तरह ही होगा।

वहीं, मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के कुमार जैन कई शंकाएं व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि मुझे नई नीति के सफल होने को लेकर संदेह है। इसकी पहली बड़ी वजह हिंदुस्तान का कल्चर है। दूसरा कारण हमारे देश में स्मगलिंग करके भी गोल्ड आता है। अब सरकार चाहे जिस तरह से गोल्ड व्यापारियों को नियम में बांधने का प्रयास करे। देश में जिस ढंग से सोना आता है, जिस ढंग से लोग उसका इस्तेमाल करते हैं, उसमें बहुत कुछ बदलाव आने की उम्मीद कम ही नजर आती है।

कमोडिटी मार्केट के जानकार इब्राहिम पटेल कहते हैं कि म्युच्युअल फंड असेट क्लास निवेश है। आज आप जब म्युच्युअल फंड में कोई भी निवेश करते हैं तो वह सरकार की जानकारी में रहता है, इसलिए मुझे लग रहा है कि जब गोल्ड को असेट क्लास का दर्जा मिलेगा, तो हमारे घर में पड़ा सोना और जो सोना हम खरीदेंगे वह सरकार को दिखाना अनिवार्य हो सकता है।

गोल्ड पॉलिसी का स्टेटस

देश में नई गोल्ड पॉलिसी लागू करने की घोषणा सरकार ने बजट में की थी। नीति आयोग इस पर अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केन्द्र सरकार को भेज चुका है। लिहाजा अब केंद्र सरकार नए साल की शुरुआत में गोल्ड पॉलिसी का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर सकती है। नई गोल्ड पॉलिसी के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल, भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, जेम ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन आदि संगठनों के सुझाव को इस पॉलिसी में शामिल किया गया है। चूंकि गोल्ड पॉलिसी के मसौदे में सोने के व्यापार से जुड़े सभी संगठनों व वर्गों की बात को शामिल किया गया है। लिहाजा मसौदा जारी होने की औपचारिकता पूरी करते ही गोल्ड पॉलिसी का लागू होना तय माना जा रहा है।

नई पॉलिसी की 2 बड़ी बातें

सोना बैंक में रखा तो मिल सकेगा ब्याज

इंडियन मर्चेंट चेंबर के आर्थिक निदेशक जी. चंद्रशेखर कहते हैं कि प्राइज फ्लक्चुएशन का फायदा मिलने वाला है। गोल्ड सेविंग एकाउंट, बैंक एकाउंट जैसा होगा। आम आदमी के पास मौजूद सोने (सिक्के और बिस्किट, ज्वैलरी नहीं) को वह बैंक में रख सकेगा और उसकी मौजूदा कीमत पर ब्याज ले पाएगा। हालांकि ब्याज दर सामान्य सेविंग अकाउंट से कम रहेगी। इसमें आपको एक पासबुक दी जाएगी। आपके गोल्ड सेविंग अकाउंट में कितना सोना है, वह बैंक आपकी पासबुक में एंट्री करके देगा।
अभी यह स्थिति है: सिर्फ मंदिर-ट्रस्ट के एक मात्रा विशेष से अधिक सोने को ही बैंक में जमा किया जा सकता है। आम आदमी शामिल नहीं है। गोल्ड बॉण्ड स्कीम में बॉण्ड भी खरीदे जा सकते हैं, लेकिन रिटर्न 2.5 फीसदी ही है।

देशभर में एक समान होगा सोने का भाव

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजे) के सचिव सुरेंद्र मेहता बताते हैं कि पॉलिसी में स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज की बात है। इससे अलग-अलग शहरों के अलग-अलग भाव का चलन बंद हो जाएगा और पूरे देश में एक ही भाव रहेगा। साथ ही निवेश करने वाले लोगों के द्वारा एक्सचेंज में किए गए सोने के सौदे की डिलीवरी उसी दिन होगी। आईबीजे ने सुझाव दिया है कि एक्सचेंज के अंदर होने वाले सौदे पर कम टैक्स लिया जाए। बाहर के सौदे पर ज्यादा टैक्स लगेगा।
अभी यह स्थिति है: रिद्धि-सिद्धि बुलियन के सीईओ पृथ्वीराज कोठारी बताते हैं कि एमसीएक्स में फ्यूचर के सौदे किए जाते हैं, उसमें सोने की डिलीवरी में 2 माह तक का वक्त लग जाता है। इसी तरह सोना बेचने पर भुगतान भी फौरन नहीं मिलता है।

यूटिलिटी डेस्क. फिजिकल गोल्ड के लेन-देन को कम करने के लिए सरकार नई गोल्ड पॉलिसी ला रही है। नीति आयोग ने पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार करके सरकार को भेज दिया है। इसे नए वर्ष में लागू किया जा सकता है। पॉलिसी में सरकार गोल्ड को संपत्ति घोषित कर सकती है। शुद्ध सोना मिले, व्यापार में पारदर्शिता आए, आयात शुल्क कम हो और सोने से बनी ज्वैलरी का निर्यात बढ़े इसलिए सरकार इसमें और भी कई महत्वपूर्ण बातों को शामिल कर रही है। हाल ही में वाणिज्य उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने गोल्ड पॉलिसी के ड्राफ्ट को जल्द लाने की घोषणा की है।

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