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Sunday, January 13, 2019

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती हैं

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती हैं

मकर संक्रांति लगभग प्रतिवर्ष 14 जनवरी को आती है। लेकिन इस बार 2019 में यह 15 जनवरी को पड़ रही है। इसी कारण प्रयागराज में हो रहा कुंभ भी इस वर्ष 15 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है। कुंभ का पहला स्नान भी 14 नहीं बल्कि 15 जनवरी को होगा।
इस साल राशि में ये परिवर्तन 14 जनवरी को देर रात को हो रहा है, इसीलिए इस बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति और क्या है इसका महत्व
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। इसीलिए इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।
राशि बदलने के साथ ही मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है. वहीं, मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास की समाप्ति और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। मकर संक्रांति में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण तक का सफर महत्व रखता है। मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण काल में ही शुभ कार्य किए जाते हैं।
सूर्य जब मकर, कुंभ, वृष, मीन, मेष और मिथुन राशि में रहता है तब इसे उत्तरायण कहते हैं। वहीं, जब सूर्य बाकी राशियों सिंह, कन्या, कर्क, तुला, वृच्छिक और धनु राशि में रहता है, तब इसे दक्षिणायन कहते हैं।
मकर संक्रांति पर तिल के महत्व की पौराणिक कहानी
एक पौराणिक कथा के अनुसार शनि देव को उनके पिता सूर्य देव पसंद नहीं करते थे। इसी कारण सूर्य देव ने शनि देव और उनकी मां छाया को अपने से अलग कर दिया। इस बात से क्रोध में आकर शनि और उनकी मां ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया।
पिता को कुष्ठ रोग में पीड़ित देख यमराज (जो कि सूर्य भगवान की दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र हैं) ने तपस्या की। यमराज की तपस्या से सूर्यदेव कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए। लेकिन सूर्य देव ने क्रोध में आकर शनि देव और उनकी माता के घर 'कुंभ' (शनि देव की राशि) को जला दिया। इससे दोनों को बहुत कष्ट हुआ।
यमराज ने अपनी सौतेली माता और भाई शनि को कष्ट में देख उनके कल्याण के लिए पिता सूर्य को समझाया। यमराज की बात मान सूर्य देव शनि से मिलने उनके घर पहुंचे। कुंभ में आग लगाने के बाद वहां सब कुछ जल गया था, सिवाय काले तिल के अलावा। इसीलिए शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव की पूजा काले तिल से की। इसके बाद सूर्य देव ने शनि को उनका दूसरा घर 'मकर' दिया।
मान्यता है कि शनि देव को तिल की वजह से ही उनके पिता, घर और सुख की प्राप्ति हुई, तभी से मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा के साथ तिल का बड़ा महत्व माना जाता है।
तिल के लड्डू खाने के फायदे
मकर संक्रान्ति के मौकै पर तिल और गुड़ के लड्डू खाए जाते हैं। ये ना सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होते हैं बल्कि यह कई गुणों से भी भरपूर होते हैं। तिल में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, ऑक्जेलिक एसिड, अमीनो एसिड, प्रोटीन, विटामिन-B, C और E होता है वहीं, गुड़ में भी सुक्रोज, ग्लूकोज और खनिज तरल पाया जाता है। जब इन दोनों का मिश्रण मिलता है तो इस लड्डू के गुण और बढ़ जाते हैं।

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